सदस्य बैंकों के लिए > प्रीमियम दर/ डीआई -01 और डीआई -02 विवरणियों पर स्पष्टीकरण नोट

(i) डीआई-01 विवरणी पर स्पष्टीकरण नोट
(ii) डीआई-02 विवणी पर स्पष्टीकरण नोट

डीआई-01 विरणी पर स्पष्टीकरण नोट

(क) प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में दो प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा विधिवत हस्ताक्षरित डीर्आइ-01 फार्म दो प्रतियों में प्रस्तुत की जानी चाहिए, उदा.
अप्रैल - सितंबर के प्रथम छमाही के लिए अप्रैल में और अक्तूबर-मार्च के दूसरे छमाही के लिए अक्तूबर में । तद्नुसार, वित्तीय वर्ष 2007-08 की दो छमाहियों डीआई-01 में दिए गए बॉक्स में 09-07 तथा 03-08 लिखें ।

माह माह वर्ष वर्ष
0 9 0 7
0 3 0 8

(ख) निर्धारणीय जमा राशि आकड़ों को नजदीकी हजार रुपये में पूर्णांकित किया जाए उदा. 21,57,00 से रुपये से 21,57,499 रुपये को 21,57,000
रुपए दर्शाया जाए और 21,57,500 रुपये से 21,57,999 की जमा राशि को 21,58,000 रुपये दर्शाया जाए ।

(ग) डीआई-01 पूर्ववर्ती छमाही के अंतिम कार्य दिवस की समाप्ति के अनुसार निर्धारणीय जमाराशियों पर आधारित होगा । यदि सितंबर/मार्च के अंतिम कार्य दिवस को परिक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 (1881 का XXVI) के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश हो तो उसे पूर्ववर्ती अंतिम कार्यदिवस की समाप्ति पर माना जाए ।

छमाही को समाप्त / समाप्ति होनेवाली छमाही के लिए डीआई-01

पूर्ववर्ती छमाही को कारोबार के समाप्ति पर निर्धारणीय जमाराशि के अनुसार

निगम को डीआई-01 और प्रीमियम अथवा पहले प्रेषित

(1)

(2)

(3)

मार्च 2006

30 सितंबर 2005

30 नवंबर 2005

सितंबर 2006

31 मार्च 2006

31 मई 2006

मार्च 2007

30 सितंबर 2006

30 नवंबर 2006

सितंबर 2007

31 मार्च 2007

31 मई 2007

कृपया यह नोट करें कि इस तारीख को डीआई-01 विवरणी से मद I में लिखें अर्थात मार्च / सितंबर को अंतिम कार्य दिवस के अनुसार भारत में जमाराशि

(घ) ब्याज भरने को टालने के लिए अप्रैल - सितंबर की विवरणी 31 मई के पहले और अक्तूबर / मार्च की विवरणी 30 नवम्बर के पहले प्रति 100 रुपये 5 पैसे की दर अग्रिम से प्रीमियम के साथ प्रस्तुत करें । प्रीमियम भुगतान के चूक के लिए निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम सामान्य विनियमाली, 1961 के विनियम 20 के तहत छमाही के प्रारंभ से निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम में लिखत प्राप्त होने तक, बैंक दर अधिक 8% की दर से दण्डात्मक ब्याज प्रभावित किया जाएगा । चेक / डीडी / भुगतान आदेश अथवा इलेक्ट्रानिक माध्यम से भुगतान जैसे कि आरटीजीएस आदि से प्रीमियम का विप्रेषण करनेवाले बीमाकृत बैंक यह सुनिश्चित करें कि उनको लिखत निधि के दर्शानेवाले प्रीमियम निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम में देय तारीख अथवा उसके पहले पहुंचें जाए । निगम में देय तारीख के बाद प्राप्त होनेवाले लिखतों को देर से प्राप्त भुगतान माना जाएगा और ऐसे बीमाकृत बैंकों से अतिदेय ब्याज देय होगा ।

ब्याज परिकलन के लिए फार्मूला इस प्रकार होगा :

देय ब्याज : अदत्त प्रीमियम X दण्डात्मक ब्याज दर X दिनों की संख्या / 36500

(ङ) जब किसी छमाही के लिए प्रीमियम की राशि विप्रेषित करते समय कृपया यह सुनिश्चित करें कि कोई पहले की नामे / जमा में राशि देय है, को विधिवत परिकलन में लिया गया है और यदि ब्याज कोई हो तो निगम को कुल राशि विप्रेषित की है ।

(च) विदेशी खाते केंद्र और राज्य सरकारों तथा अन्य जैसे वाणिज्य, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के खातों को शामिल न किया गया हो ।


डीआई-02 विरणी पर स्पष्टीकरण नोट

(1) सभी पंजीकृत बीमित बैंकों से अपेक्षित है कि वे निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम अधिनियम,1961 की धारा 34(1) के प्रावधानों के अनुसार वार्षिक विवरणी डीआई-02 विवरणी प्रस्तुत करें ।
(2) यह विवरणी अलग अग्रेषण पत्र के साथ हर वर्ष निक्षेप बीमा और प्रत्यय गारंटी निगम (जमा बीमा विभाग), प्रधान कार्यालय, मुंबई में 31 अक्तूबर या उससे पहले पहुंच जानी चाहिए ।
(3) डीआई-02 विवरणी का फार्मेट दो प्राधिकृत अधिकारियों द्वारा हस्ताक्षरित होना है और आवश्यक है कि उसे दो प्रतियों में प्रस्तुत किया जाए । दूसरी प्रति मूल प्रति की सही सत्य प्रति होनी चाहिए ।
(4) यह सितंबर महीने के अंतिम कार्य दिवस की राशि की मात्रा के अनुसार वितरित जमा लेखों को दर्शाने वाली विवरणी है ।
(5) यदि सितंबर के अंतिम कार्य दिवस को परिक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (1881 का XXVI) के अंतर्गत सार्वजनिक अवकाश हो तो उसे पूर्ववर्ती कार्यदिवस की समाप्ति पर माना जाए ।
(6) डीआई-02 का अनुपालन करते समय निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदूओं पर ध्यानपूर्वक नोट किया जाए ।
  (i) विदेशी, केंद्र और राज्य सरकारों और वाणिज्य, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक के खातों को शामिल नहीं किया गया है ।
  (ii) जमा की राशि को हजार रुपये में दर्शाए, दूसरे शब्दों में तीन शून्य न लिखें ।
  उदाहरण
 
(क) 28,95,235.00 रुपये को इस प्रकार दर्शाया जाए     2 8 9 5
(ख) 2,55,37,932.00 रुपये को इस प्रकार दर्शाया जाए   2 5 5 3 8
(ग) 38,44,54,500.00 रुपये को इस प्रकार दर्शाया जाए 3 8 4 4 5 5
  (iii)विवरणी के मद (i) से (iv) ही पर दर्शायी जानेवाली जमाराशि की निर्धारित श्रेणी को ध्यान में रखतें हुए प्रत्येक अवलोकन दर्शाना आवश्यक है, चारों श्रेणियों के अंतर्गत खातों की संख्या की तुलना में न्यूनतम/अधिकतम जमा राशि होना अनिवार्य है।
 
  जमा राशि की श्रेणी खाता संख्या जमा राशि (हजार रुपये में)
      न्यूनतम अधिकतम
1) 1,00,000 रुपये तक और सहित जैसा कि 2550 -- 2550 X 1,00,000 = 25,50,00,000
          2 5 5 0 0 0
      अर्थात् खातों की संख्या X 1,00,000
2) 1,00,000 रुपये से अधिक और 1,50,000 रुपये तक जैसा कि 328050 328050 X 100001 = 32805328050 328050 X 150000 = 49207500000
    3 2 8 0 5 3 2 8 4 9 2 0 7 5 0 0
    अर्थात खातों की संख्या X 100001 अर्थात खातों की संख्या X 150000
3) 150000 से अधिक और 200000 तक जैसा कि 112930 112930 X 150001 = 16939612930 112930 X 200000 = 22586000000
    1 6 9 3 9 6 1 3 2 2 5 8 6 0 0 0
    अर्थात खातों की संख्या X 1500001 अर्थात खातों की संख्या X 200000
4) 2,00,000 रुपए से अधिक जैसा कि 89534 89534 x 200001 = 17906889534  
    1 7 9 0 6 8 9 0  
    अर्थात खातों की संख्या X 2000001  
  अतः प्रत्येक बैंक के लिए यह अनिवार्य है कि वे विवरण के सभी चार मदों में दर्शायी गयी राशि की खातों की संख्या के प्रति जांच करें ।
   
डिस्क्लैमर  |  दिशा निर्देश  |   निविदा प्रलेख   |   अन्य लिन्क्स