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प्रश्न 1 निबीप्रगानि द्वारा किन बैंकों का बीमा किया जाता है?

प्रश्न 2 निबीप्रगानि किसका बीमा करता है?

प्रश्न 3 निबीप्रगानि द्वारा बीमा की जाने वाली अधिकतम जमाराशि क्या है?

प्रश्न 4 मुझे किस तरह पता चलेगा कि मेरा बैंक निबीप्रगानि द्वारा बीमाकृत है या नहीं?

प्रश्न 5 किसी बैंक के विभिन्न बैंकों में एक व्यक्ति द्वारा रखी गई बीमाकृत जमाराशियों की राशि पर उच्चतम सीमा क्या है?

प्रश्न 6 क्या निबीप्रगानि केवल लेखागत मूलधन का बीमा करता है या मूलधन और उस पर उपचित ब्याज दोनों का?

प्रश्न 7 क्या किसी एक ही बैंक के विभिन्न खाते में निधियां जमा करने से जमा बीमा को बढ़ाया जा सकता है?

प्रश्न 8 एकल स्वामित्व वाला खाता क्या है?

प्रश्न 9 यदि दो विभिन्न बैंकों में मेरी निधियां हैं और दोनों बैंक एक ही दिन बंद हो जाते हैं तो क्या मेरी निधियों को एक साथ जोड़ा जाएगा या अलग - अलग बीमा किया जाएगा?

प्रश्न 10 समान अधिकार और क्षमता में और विभिन्न अधिकार और क्षमता में रखी गई जमाराशियों का अर्थ क्या है?

प्रश्न 11 क्या बैंक जमाकर्ता द्वारा देय राशि की कटौती कर सकता है?

प्रश्न 12 जमा बीमा की लागत का वहन कौन करता है?

प्रश्न 13 निबीप्रगानि भुगतान करने के लिए कब जिम्मेदार होगा?

प्रश्न 14 क्या निबीप्रगानि विफल बैंकों के साथ सीधे कार्रवाई करता है?

प्रश्न 15 क्या कोई बीमाकृत बैंक निबीप्रगानि कवरेज से अलग हो सकते हैं?

प्रश्न 16 क्या निबीप्रगानि किसी बैंक के बीमा कवरेज को समाप्त कर सकता है?

प्रश्न 17 पंजीकरण रद्द करने की स्थिति में बैंकों के प्रति निगम का क्या दायित्व है?

प्रश्न 1 निबीप्रगानि द्वारा किन बैंकों का बीमा किया जाता है?

वाणिज्य बैंक : भारत में कार्यरत विदेशी बैंकों की शाखाओं, स्थानीय क्षेत्र बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक सहित सभी वाणिज्य बैंक का बीमा निबीप्रगानि द्वारा किया जाता है।

सहकारी बैंक :राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों में कार्य कर रहे सभी राज्य, मध्यवर्ती और प्राथमिक सहकारी बैंक, जिन्हें शहरी सहकारी बैंक भी कहा जाता है, के संबंधित राज्य/संघशासित क्षेत्र की सरकारों द्वारा रिज़र्व बैंक को यह अधिकार देने के लिए अपने सहकारी समिति अधिनियम को संशोधित किया गया है कि वह राज्यों /संघ शासित क्षेत्रों की समितियों के रजिस्ट्रार को आदेश दे सके कि किसी सहकारी बैंक का समापन कर दे अथवा इसके प्रबंध समिति को अधिक्रमित करे और रजिस्ट्रार से अपेक्षित है कि वह रिज़र्व बैंक से लिखित पूर्व स्वीकृति के बिना किसी सहकारी बैंक के समापन, समामेलन या पुनर्निमाण के लिए कोई कार्रवाई न करें, जमा बीमा स्कीम के अंतर्गत आते हैं । वर्तमान में मेघालय, मिजोरम, नागालैण्ड राज्य तथा चंडीगढ़, लक्षद्वीप, दादरा और नगर हवेली के संघ शासित क्षेत्रों के अलावा अन्य राज्यों / संघ शासित क्षेत्रों के सभी सहकारी बैंक निबीप्रगानि द्वारा बीमित किए जाते हैं ।

निबीप्रगानि द्वारा प्राथमिक सहकारी समितियों का बीमा नहीं किया जाता है

प्रश्न 2 निबीप्रगानि किसका बीमा करता है?

किसी बैंक के विफल होने की स्थिति में निबीप्रगानि भारत में देय बैंक जमाराशियों को बीमा सुरक्षा प्रदान करता है.
निबीप्रगानि निम्नलिखित जमाराशियों को छोड़कर बचत, मीयादी , चालू, आवर्ती आदि जैसे सभी बैंक जमाराशियों को बीमा प्रदान करता है ।
(i) विदेशी सरकारों की जमाराशियां;
(ii) केंद्र/राज्य सरकारों की जमाराशियां;
(iii) अंतर बैंक जमाराशियां;
(iv) राज्य सहकारी बैंकों में रखी गई राज्य भूमि विकास बैंकों की जमाराशियां;
(v) भारत के बाहर प्राप्त जमाराशि के कारण देय कोई राशि; और
(vi) रिज़र्व बैंक के पूर्वानुमोदन से निगम द्वारा विशेष रूप से छूट प्राप्त कोई राशि


प्रश्न 3 निबीप्रगानि द्वारा बीमा की जाने वाली अधिकतम जमाराशि क्या है?

किसी बैंक में बैंक के लाइसेंस रद्द करने/परिसमापन की तारीख तक अथवा समामेलन/विलय/पुनर्निर्माण स्कीम लागू होने की तारीख तक प्रत्येक जमाकर्ता को किसी बैंक में समान अधिकार एवं क्षमता में रखे गए मूलधन और ब्याज दोनों के लिए अधिकतम 1,00,000 रु.(एक लाख रुपए ) तक बीमा प्रदान किया जाता है।

प्रश्न 4 मुझे किस तरह पता चलेगा कि मेरा बैंक निबीप्रगानि द्वारा बीमाकृत है या नहीं?

निबीप्रगानि बैंकों को बीमाकृत बैंकों के रूप में पंजीकृत करते समय उन्हें मुद्रित पर्चे प्रदर्शित करने के लिए उपलब्ध कराता है जिसमें बीमाकृत बैकों को निगम द्वारा दी जाने वाली बीमा सुरक्षा संबंधी जानकारी दी जाती है। किसी संदेह की स्थिति में जमाकर्ता इस संबंध में शाखा अधिकारी से पूछ-ताछ कर सकता है।

प्रश्न 5 किसी बैंक के विभिन्न बैंकों में एक व्यक्ति द्वारा रखी गई बीमाकृत जमाराशियों की राशि पर उच्चतम सीमा क्या है?

किसी बैंक के विभिन्न शाखाओं में रखी गई विभिन्न जमाराशियों को बीमा सुरक्षा के प्रयोजन से कुल उच्चतम सीमा के निर्धारण में शामिल किया जाता है और अधिकतम एक लाख रुपए तक भुगतान किया जाता है।

प्रश्न 6 क्या निबीप्रगानि केवल लेखागत मूलधन का बीमा करता है या मूलधन और उस पर उपचित ब्याज दोनों का?

निबिप्रगानि मूलधन और ब्याज का अधिकतम एक लाख रु. तक बीमा करता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति के खाते में 95,000 रु मूलधन और उस पर उपचित ब्याज 4,000 रु है तो निबीप्रगानि द्वारा बीमाकृत राशि 99,000 रु है। यदि उस खाते में मूलधन एक लाख है तो उस पर उपचित ब्याज का बीमा नहीं किया जाएगा, इसलिए नहीं कि यह राशि ब्याज है बल्कि इसलिए कि यह राशि बीमा सीमा से अधिक है।

प्रश्न 7 क्या किसी एक ही बैंक के विभिन्न खाते में निधियां जमा करने से जमा बीमा को बढ़ाया जा सकता है?

नहीं। जमा बीमा निर्धारित करने से पहले एक ही बैंक में एक ही स्वामित्व के अंतर्गत रखी गई सभी निधियों को जोड़ा जाता है। यदि निधियां विभिन्न स्वामित्व वाली हैं अथवा अलग-अलग बैंकों में रखी गई हों फिर उनका अलग -अलग बीमा किया जाएगा।


प्रश्न 8 क्या विभिन्न बैंकों में रखी गई जमाराशियों का बीमा अलग -अलग किया जाता है?
हां। यदि आपकी जमाराशियां एक से अधिक बैंक में हैं तो जमा बीमा कवरेज की सीमा प्रत्येक बैंक के लिए अलग -अलग लागू होगी।

प्रश्न 9 यदि दो विभिन्न बैंकों में मेरी निधियां हैं और दोनों बैंक एक ही दिन बंद हो जाते हैं तो क्या मेरी निधियों को एक साथ जोड़ा जाएगा या अलग -अलग बीमा किया जाएगा?

समापन तारीख पर विचार किए बिना प्रत्येक बैंक में आपकी निधियों का अलग -अलग बीमा किया जाएगा।

प्रश्न 10 समान अधिकार और क्षमता में और विभिन्न अधिकार और क्षमता में रखी गई जमाराशियों का अर्थ क्या है?

यदि कोई व्यक्ति एक बैंक में अपने नाम पर एक से अधिक खाते खोलता है, उदाहरण के लिए श्री. के. ए. पंडित एक बचत खाता और एक या एक से अधिक मीयादी जमाराशि खाते खोलता है, तो सभी खातों को समान अधिकार और क्षमता में माना जाता है और बीमा कवरेज अधिकतम एक लाख रुपए तक सीमित रखा जाता है। परंतु यदि श्री.के .ए.पंडित एक संयुक्त खाता खोलते हैं तो उस संयुक्त खाते को विभिन्न अधिकार और क्षमता में समझा जाता है और बीमा कवरेज अलग अलग दिया जाता है। संयुक्त जमाकर्ताओं द्वारा पृथक-पृथक (व्यक्तिगत रूप से) रखी गयी जमाराशि से अलग प्रत्येक संयुक्त खाता का अलग-अलग बीमा किया जाता है। समान व्यक्तियों के संयोजन के स्वामित्व वाले संयुक्त खाते को एक साथ जोड़ा जाता है और एक लाख तक की कुल राशि का बीमा किया जाता है। विभिन्न व्यक्तियों के संयोजन के स्वामित्व वाले प्रत्येक संयुक्त खाता में एक लाख रु की राशि बीमित है।

उदाहरण

विभिन्न क्षमताओं में धारित जमाराशियां
बचत खाता चालू खाता मीयादी जमा खाता कुल जमाराशियां बीमाकृत जमाराशियां
श्री.एस.के.पंडित
(व्यक्तिगत) 17,200 22,000 80,000 1,19,200 1,00,000
श्री.एस.के.पंडित (एबीसी और कं के भागीदार) 75,000 50,000 1,25,000 1,00,000
श्री.एस.के.पंडित (मास्टर अजित के अभिभावक)) 7,800 80,000 87,800 87,800
श्री.एस.के.पंडित (निदेशक जे.के उद्योग लिमि.,) 2,30,000 45,000 2,75,000 1,00,000

संयुक्त खाते में रखी गई जमाराशियां
खाता (i) पहला खाता धारक - "श्री ए.के.शर्मा "
दूसरा खाता धारक - "श्रीमती बी. शर्मा "
अधिकतम बीमाकृत राशि
1 लाख रुपए तक

खाता (ii) पहला खाता धारक - "श्री. ए.के.शर्मा "
दूसरा खाता धारक - "श्री. पी.शर्मा "
अधिकतम बीमाकृत राशि
1 लाख रुपए तक

खाता(iii) पहला खाता धारक - "श्रीमती. बी. शर्मा "
दूसरा खाता धारक - "श्री. ए.के.शर्मा "
इस खाते को खाता (i) में शामिल किया जाएगा।

खाता(iv) पहला खाता धारक - "श्री. ए.के.शर्मा "
दूसरा खाता धारक - " श्रीमती. बी. शर्मा "
तीसरा धारक - "श्री. पी.शर्मा " अधिकतक बीमाकृत राशि
1 लाख रुपए तक

खाता(v) पहला खाता धारक - " श्रीमती. बी.शर्मा "
दूसरा खाता धारक - " श्री. ए.के. शर्मा "
इस खाते को खाता (iv) में शामिल किया जाएगा।

प्रश्न 11 क्या बैंक जमाकर्ता द्वारा देय राशि की कटौती कर सकता है?

हां। बैंक को जमाराशि में से अपनी प्राप्य राशि के समंजन का अधिकार है। इस प्रकार के देयताओं के समायोजन के बाद जमा बीमा उपलब्ध है।

प्रश्न 12 जमा बीमा की लागत का वहन कौन करता है?
जमा बीमा प्रीमियम पूर्णत: बीमाकृत बैंक द्वारा वहन किया जाता है।

प्रश्न 13 निबीप्रगानि भुगतान करने के लिए कब जिम्मेदार होगा?
यदि किसी बैंक का परिसमापन हो जाता है : निबीप्रगानि प्रत्येक जमाकर्ता को उसकी जमाराशि का एक लाख रुपए तक परिसमापक से दावा सूची प्राप्त करने के दो महीनों के अंदर परिसमापक के माध्यम से भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है।

यदि किसी बैंक का पुनर्निमाण अथवा किसी दूसरे बैंक के साथ समामेलन/विलय होता है : किसी बीमाकृत बैंक के संबंध में जहां किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा समझौता या व्यवस्था या पुनर्निमाण अथवा समामेलन की स्कीम स्वीकृत की जाती है और उक्त स्कीम इसके प्रभावी होने की तारीख से प्रत्येक जमाकर्ता को मूल राशि और निर्धारित राशि से से जो भी कम हो भुगतान करने या जमा करने का प्रावधान करता है तो निगम निबीप्रगानि अधिनियम की धारा 18 के प्रावधानों के अंतर्गत ऐसे प्रत्येक जमाकर्ता को इस प्रकार प्रदत्त या जमा की गयी राशि और मूल राशि के बीच के अंतर, अथवा इस प्रकार प्रदत्त या जमा की गयी राशि और निर्धारित की गयी राशि के बीच के अंतर की राशि में से, जो भी कम हो ,के समान राशि का भुगतान करने हेतु बाध्य है।

प्रश्न 14 क्या निबीप्रगानि विफल बैंकों के साथ सीधे कार्रवाई करता है?
नहीं । किसी बैंक के परिसमापन की स्थिति में परिसमापक जमाकर्तावार दावा सूची तैयार करता है और संवीक्षा तथा भुगतान हेतु निबीप्रगानि को प्रेषित करता है। निबीप्रगानि परिसमापक को भुगतान करता है जो जमाकर्ताओं को भुगतान करने के लिए जिम्मेदार है। बैंकों के समामेलन/विलय की स्थिति में प्रत्येक जमाकर्ता को देय राशि का भुगतान अंतरिती बैंक को किया जाता है।

प्रश्न 15 क्या कोई बीमाकृत बैंक निबीप्रगानि कवरेज से अलग हो सकते हैं?

नहीं। जमा बीमा स्कीम अनिवार्य है और कोई बैंक इससे अलग नहीं हो सकता है।

प्रश्न 16 क्या निबीप्रगानि किसी बैंक के बीमा कवरेज समाप्त कर सकता है?

निगम किसी बीमाकृत बैंक का पंजीकरण रद्द कर सकता है यदि वह लगातार तीन अर्धवार्षिक अवधि का प्रीमियम भुगतान नहीं करता है। निबीप्रगानि द्वारा किसी बैंक द्वारा प्रीमियम भरने में चूक के लिए अपने कवरेज से अलग करने की स्थिति में जनता को समाचार पत्रों के जरिए इसकी सूचना दी जाती है।

किसी बीमाकृत बैंक का पंजीकरण निम्न परिस्थितियों में रद्द किया जा सकता है- आगे और जमाराशियां स्वीकार करने से उसे प्रतिबंधित किया गया हो; अथवा रिज़र्व बैंक द्वारा इसका लाइसेंस रद्द किया गया हो अथवा नहीं दिया गया हो; अथवा उसका समापन स्वैच्छिक रूप से अथवा अनिवार्यतः किया गया हो; अथवा बैंककारी विनियमन अधिनियम, 1949 की धारा 36 (ए) के आशय में अब बैंकिंग कंपनी या सहकारी बैंक नहीं कहलाता हो; अथवा इसने अपनी सारी जमा देयताओं को किसी अन्य संस्था को अंतरित कर दिया हो अथवा यह किसी अन्य बैंक के साथ समामेलित हो गया हो अथवा किसी सक्षम प्राधिकारी द्वारा कोई समझौता, व्यवस्था या पुनर्निर्माण स्कीम स्वीकृत किया हो और यह स्कीम आगे और जमाराशियां स्वीकार करने की अनुमति न देता हो। किसी बैंक का पंजीकरण रद्द करने की स्थिति में पंजीकरण रद्द करने की तारीख तक बैंक की जमाराशियों को बीमा कवर प्राप्त होगा।

प्रश्न 17 पंजीकरण रद्द करने की स्थिति में बैंकों के प्रति निगम का क्या दायित्व है?

" बीमाकृत बैंकों " के परिसमापन आदि की स्थिति में अर्थात् ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण निम्नलिखित कारणों से रद्द कर दिया गया है: (क) भविष्य में और जमाराशियां स्वीकार करने से प्रतिबंधित किया हो अथवा (ख) जिसका लाइसेंस रद्द कर दिया गया हो या यह पाये जाने पर कि लाइसेस नहीं दिया जा सकता है, उन बैंकों के प्रति जमा बीमा दायित्व है। इन मामलों में निगम का दायित्व बीमाकृत बैंक के रूप में बैंक के पंजीकरण रद्द करने की तारीख तक जमाराशियों की सीमा तक है।

पंजीकरण रद्द किए गए अन्य बैंकों के परिसमापन आदि के संबंध में अर्थात ऐसे बैंक जिनका पंजीकरण प्रीमियम का भुगतान न करने अथवा निबीप्रगानि अधिनियम, 1961 की धारा 2(जीजी) के आशय के अंतर्गत पात्र सहकारी बैंकों के रूप में कार्य करना बंद कर दिया हो तो निगम का कोई दायित्व नहीं है।

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